18 वर्षों से रिक्त हैं स्थायी निदेशक का पद
सुनील कुमार गुप्ता
कांके। रांची तांत्रिका मनोचिकित्सा एवम् संबद्ध विज्ञान संस्थान (रिनपास) कांके रांची वर्तमान में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। मनोचिकित्सा एवं शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों में से एक रिनपास पिछले 18 वर्षों से भी अधिक समय से एक स्थायी निदेशक की बाट जोह रहा है। लेकिन इस राज्य सरकार की लापरवाही कहे या राज्य सरकार की कमजोर शासन व्यवस्था। एक स्थायी निदेशक की नियुक्ति यहां पिछले साढे 18 वर्षों से नहीं कर पाई है। राज्य में इन वर्षों में कई मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बदले लेकिन किसी ने भी इस संस्थान की बेहतरी के लिए सुधि नहीं ली। फलस्वरुप प्रतिदिन ओपीडी में सैकड़ो की संख्या में मानसिक मरीजों का इलाज करने वाला और वर्तमान में 600 से भी अधिक मानसिक मरीजों को अस्पताल में रखकर इलाज करने वाला यह संस्थान आज सरकार की लालफीताशाही और कमजोर गवर्नेंस को इंगित करता है।
हेमंत सोरेन सरकार ने 14 अक्टूबर 2024 को स्थाई निदेशक की नियुक्ति को लेकर कैबिनेट की बैठक में रिनपास में स्थायी निदेशक का पद हेतू रिनपास निदेशक की नियुक्ति एवं सेवाशर्त नियमावली 2023 में संशोधन को मंजूरी दी थी। लेकिन मंजूरी मिलने के बावजूद डेढ़ वर्ष बीतने को है लेकिन स्थायी निदेशक की नियुक्ति को लेकर ना ही अभी तक कोई विज्ञापन निकाला गया। ना ही कभी मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री के स्तर पर कोई बयानबाजी ही की गई। फलस्वरूप कई आरोपों से घिरे और जूनियर प्राध्यापक को यहां का प्रभारी निदेशक स्वास्थ्य मंत्री ने बना दिया। जिस पर कई गंभीर आरोप विभागीय स्तर पर लगे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव और स्वास्थ्य मंत्री कभी भी अपने बयानों में चर्चा तक नहीं करते कि मानसिक रोगियों का इलाज करने वाला देश व राज्य के इस उत्कृष्ट संस्थान को कब स्थायी निदेशक मिलेगा। इसके समाधान के लिए कब विज्ञापन निकालकर स्थायी निदेशक की नियुक्ति की जाएगी। बताते चले कि प्रभारी निदेशकों के भरोसे रिनपास मानसिक अस्पताल 18 वर्षों से कार्य कर रहा है। वर्ष अगस्त 2007 से ही यहाँ स्थायी निदेशक का पद रिक्त हैं। सैकड़ो की संख्या में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी सहित उच्च पदों पर भी काफी पद यहां पर रिक्त है। लेकिन यहां नियुक्तियां नहीं की जा रही है। निजी सिक्योरिटी गार्ड्स, प्राइवेट नर्सों के भरोसे मानसिक रोगी इलाजरत है। वहीं वर्तमान समय में संस्थान में भ्रष्टाचार भी चरम सीमा पर है। ब्लैकलिस्टेड सिक्योरिटी एजेंसी सामानता सिक्योरिटी कंपनी को 3 वर्षों से कार्यभार देकर ठेका देने,मेन पावर की नियुक्ति का अधिकार देने, 3 वर्षों से भी अधिक समय से एवरग्रीन सर्विसेज को सफाई कर्मियों का ठेका देने, सिक्योरिटी और सफाई एजेंसी को बार-बार सेवा विस्तार देने, जैम पोर्टल से उँची दामों पर उपकरणों व फर्नीचर खरीददारी करने, दवा खरीददारी, सुरक्षा गार्डों, सफाई कर्मी, नर्स बहाली वार्ड अटेंडेंट बहाली के नाम पर वसूली करने की शिकायतें अधिकारियों कर्मचारियों पर लगते रहे हैं।
स्थानीय नेताओं सहीत सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वर्तमान प्रभारी निदेशक के विरुद्ध कई शिकायत सरकार के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर अवगत कराया है। लेकिन कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। जिससे लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है।
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