केवीके जिला का एकमात्र कृषि शैक्षणिक केन्द्र : डा. एससी दुबे
केवीके दिव्यायान रांची को सबसे अधिक अवार्ड मिला
सुनील कुमार गुप्ता
कांके । आईसीएआर-अटारी, पटना द्वारा नामकुम स्थित राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान में आयोजित बिहार एवं झारखंड के 68 कृषि विज्ञान केन्द्रों का तीन दिवसीय वार्षिक क्षेत्रीय समीक्षात्मक कार्यशाला का समापन सोमवार को हुआ । बतौर मुख्य अतिथि बीएवू कुलपति डा. एससी दुबे ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) जिला स्तर पर किसानों का एकमात्र कृषि से जुडा शैक्षणिक केन्द्र है । जहां किसानों के लिए कृषि के लाभकारी ज्ञान दी जाती है । बिहार एवं झारखंड के जिलों के कृषि उत्थान में केवीके की महती भुमिका है । दोनों राज्यों में कृषि विस्तार कार्य काफी सराहनीय रहा है । लेकिन बदलते कृषि परिवेश और डीजीटल युग में केवीके को किसानोपयोगी गतिविधियों को वैज्ञानिक रूप- रंग के साथ प्रदर्शित करने की जरूरत है । सभी केवीके ने अनेकों सफलता की कहानियां रची है, इससे खास किसानों को ही लाभ मिला है , लेकिन इस सफलता का जिले के अन्य किसानों पर प्रभावों का अध्ययन भी जरूरी है । केवीके को सफल कहानियों का सोशल इम्पैक्ट का अध्ययन, विश्लेषण और उससे सीख लेने की आवश्यकता है ।
इस अवसर पर कुलपति ने डा. अंजनी कुमार को अटारी निदेशक के रूप आखरी क्षेत्रीय कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए शाॅल एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया ।
मौके पर आय सृजन, आईसीएआर नीधि से अलग कृषि विकास, सीड हब, गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन, अधिकतम बेहतर प्रत्यक्षण , उन्नत कृषि यंत्र, निकरा, आर्या, जलवायु अनुकुल कृषि उत्थान, फार्म इनोवेशन, टीएसपी प्रत्यक्षण, प्रसंस्करण ईकाई संचालन और देशज तकनीकी उत्थान आदि कार्यक्रमों में उत्कृष्ठ कार्य के लिए केवीके एवं इनके वरिष्ठ वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया । उत्कृष्ठ कार्य के लिए सबसे अधिक चार पुरस्कार केवीके दिव्यायान, रांची को मिला, जिसे वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डा. अजीत कुमार सिंह ने ग्रहण किया । इस केन्द्र के मिलेट उत्पाद एव॔ धान के देशज तकनीक उन्नयन कार्यक्रम को विशेष रूप से सराहा गया ।
कार्यशाला में केवीके के कुल 132 सफल कहानियों को बिहार एवं झारखंड के केन्द्रों ने प्रस्तुत किया । मौके पर बेस्ट सक्सेस स्टोरी के लिए केवीके भागलपुर को पहला, केवीके लातेहार व पटना को दुसरा तथा केवीके गढवा व देवघर को तीसरा पुरूस्कार मिला । जिसे केवीके प्रधान को कुलपति ने प्रदान किया ।
मौके पर विशिष्ठ अतिथि निसा निदेशक डा. ए. कार ने कार्यशाला को केवीके वैज्ञानिकों के लिए ज्ञान अध्ययन,अनुभव, सीख और तकनीकी साझेदारी का उत्तम स्थान बताया । उन्होंने वैज्ञानिकों को फसल कटाई उपरांत उत्पादों के मूल्यवर्धन पर बल दिया ।
स्वागत भाषण में अटारी निदेशक डा. अंजनी कुमार ने कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों से मिली नवीनतम कृषि तकनीकी जानकारी को जिले के सभी हितकारकों एवं बहुतायत किसान तक विस्तार करने की सलाह दी । उन्होंने कहा कि सभी केवीके का कार्य बेहद सराहनीय हैं, लेकिन थोड़ा अधिक बेहतर और सुझावों पर ध्यान देनी होगी । विकसित भारत के संकल्प को पुरा करने के लिए किसानों के लिए केवीके वैज्ञानिकों को निरंतर तत्पर रहना होगा । मौके पर डा. विशाल नाथ, डा. रेखा सिन्हा, डा. रतनेश झा, डा. निर्मल सिंह, डा. धर्मवीर सिंह एवं डा. प्रज्ञा भदुडिया सहित बिहार एवं झारखंड से भाग ले रहे 68 केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रधान भी मौजुद थे । धन्यवाद अटारी के प्रधान वैज्ञानिक डा. मोनोबुल्लाह ने तथा मंच संचालन डा. अंजेश कुमार ने किया ।

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