कांके। केंद्रीय मन: चिकित्सा संस्थान (सीआईपी) परिसर में 156 सुरक्षाकर्मीयों का पिछले 24 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी हैं। लेकिन सुरक्षा कर्मियों की मांगों पर सीआईपी प्रशासन, राज्य सरकार, केंद्र सरकार मौन धारण किए हुए हैं। सांसद, विधायक और स्थानीय नेतागण भी सिर्फ इन लोगों की मांगों पर आश्वासन दे रहे हैं। अपने स्तर से कारवाई कर रहे हैं। लेकिन नौकरी मिलेगी कि नहीं मिलेगी इस बात पर सभी मौन साधे हुए हैं। जिसके कारण 156 सुरक्षाकर्मियों के घरों में भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है, क्योंकि यहां नौकरी करके ही उनके घर का परिवार का भरण पोषण होता था। अभी स्थिति यह है कि आंदोलनकारीयों का सब्र का बांध भी टूटने लगा है आगे आंदोलन क्या मोड़ लेगा यह कहा नहीं जा सकता है। आंदोलनकारी सुरक्षाकर्मी सांसदों, विधायकों और स्थानीय नेताओं सहित संस्थान के निदेशक को घर और कार्यालय में जाकर अपनी मांगों से संबंधित पत्र देखकर विनम्र आग्रह भी कर चुके हैं। लेकिन कार्रवाई किसी भी स्तर पर किए जाने की सूचना अप्राप्त है। प्राप्त सूचना के अनुसार झारखंड विधानसभा का सत्र भी चल रहा है लेकिन इन 156 सुरक्षा कर्मियों का आवाज उठाने वाला झारखंड विधानसभा में कोई भी विधायक नहीं है। सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के ढुल मूल रवैया के कारण और सीआईपी निदेशक के कार्य शैली के कारण आज हम लोग बेरोजगार हो गए हैं। हम लोगों की सुनने वाला कोई नहीं है।
निदेशक डॉ बीके चौधरी और केंद्र सरकार की मांग पर
राज्य सरकार ने अपना होमगार्ड जवान संस्थान में कार्य हेतु दिया है, तो इसे राज्य सरकार वापस लेकर हम लोगों को रोजगार दे सकती है और पुन: नौकरी पर रखवा भी सकती है। लेकिन राज्य सरकार के मंत्री और अधिकारी इस पर भी मौन साधे हुए हैं। कई वर्षो से नौकरी करने के बाद नौकरी से निकाले गए सभी सुरक्षा कर्मियों की मांग है कि सरकार हम लोगों को नौकरी दे, नहीं तो मौत दे। क्योंकि घूंट-घूंट कर जीने से अच्छा है मर जाना।

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