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पेसा नियमावली पर जारी राजनीतिक टकराव, अधिसूचना नहीं होने से बढ़ी सियासी हलचल

 

रांची: पेसा नियमावली को लेकर झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बावजूद अब तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं होने पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। वहीं सत्तारूढ़ दल विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भ्रम फैलाने का दावा कर रहा है।

भाजपा सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए पेसा नियमावली को सार्वजनिक करने की खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि पेसा एक्ट 1996 में संसद द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में स्वशासन के उद्देश्य से बनाया गया था, जिसके तहत पंचायत चुनाव भी कराए गए। वर्तमान सरकार ने नियमावली को कैबिनेट से मंजूरी तो दे दी है, लेकिन इसके प्रावधानों को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जो जनता के अधिकारों के खिलाफ है।

इधर विपक्ष के हमले का जवाब देने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन जेएमएम–कांग्रेस–राजद सामने आया है। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि कैबिनेट से पारित किसी भी विषय को सार्वजनिक किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा को इस मुद्दे पर इतनी बेचैनी क्यों हो रही है। साथ ही भाजपा पर भ्रम और अफवाह फैलाने का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि 23 दिसंबर को हेमंत कैबिनेट ने लंबी जद्दोजहद के बाद पेसा नियमावली को मंजूरी दी थी। इसके बाद से ही इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि इसमें आदिवासियों की पारंपरिक, धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था को किस हद तक मान्यता दी गई है। जब तक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक इसके वास्तविक प्रावधानों को लेकर अटकलें बनी रहेंगी।

उल्लेखनीय है कि राज्य गठन के बाद वर्ष 2001 में झारखंड पंचायती राज अधिनियम पारित किया गया था, लेकिन इसे अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। पेसा को लेकर समय-समय पर मांगें उठती रही हैं और इस संबंध में न्यायालय के आदेश भी आते रहे हैं। मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट में प्रस्तावित है।

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