पटना। बिहार में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य के 5.87 लाख शिक्षकों के लिए प्रोजेक्ट आधारित प्रशिक्षण को अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रशिक्षण समग्र शिक्षा अभियान के तहत राज्य के 71,863 प्रारंभिक और 9,360 माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने इसके लिए साल में दो बार 50-50 घंटे की ट्रेनिंग की कार्य योजना तैयार की है। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाना, समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहित करना और छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। विभाग का कहना है कि शिक्षकों की संख्या अब पर्याप्त हो चुकी है, इसलिए फोकस अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर है।
आंकड़ों के मुताबिक छात्र-शिक्षक अनुपात में भी बड़ा सुधार हुआ है। वर्ष 2005 में जहां 65 छात्रों पर एक शिक्षक था, वहीं 2026 में यह अनुपात घटकर 29 छात्रों पर एक शिक्षक हो गया है। आने वाले समय में नई नियुक्तियों से यह अनुपात और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सरकारी विद्यालयों में छात्रों के लिए भी प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग लागू की जाएगी। इसके लिए एससीईआरटी को अध्ययन सामग्री तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि सभी डायट संस्थानों को प्रशिक्षण की तैयारी में सक्रिय किया गया है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार से प्रशिक्षण मद में 63.20 करोड़ रुपये मिलेंगे। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि नियमित प्रशिक्षण के जरिए शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और नई तकनीकों से जोड़ा जाएगा।
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