रांची: झारखंड में 15 दिसंबर से धान की सरकारी खरीद की शुरुआत हो गई है। इस वर्ष राज्य सरकार ने किसानों से 2450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करीब 60 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है। बंपर पैदावार के चलते जहां कई किसानों के चेहरे पर खुशी दिख रही है, वहीं कुछ किसान बिचौलियों के कारण अब भी निराश नजर आ रहे हैं।
राज्यभर में 750 से अधिक धान अधिप्राप्ति केंद्रों पर खरीद प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों के अनुसार धान की खरीद पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की जा रही है। इस बार किसानों को बड़ी राहत देते हुए धान बेचने के 48 घंटे से लेकर अधिकतम सात दिनों के भीतर एकमुश्त भुगतान किए जाने की व्यवस्था की गई है। यह राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि धान की तौल, सत्यापन और ऑनलाइन अपलोड की प्रक्रिया पूरी होते ही भुगतान प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिससे किसानों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे समय की बचत के साथ-साथ पारदर्शिता भी बनी रहेगी।
हालांकि, कुछ किसानों का कहना है कि धान खरीद की प्रक्रिया नवंबर के दूसरे सप्ताह से ही शुरू हो जानी चाहिए थी। देरी के कारण कई किसानों को मजबूरी में अपना धान पहले ही बिचौलियों को कम कीमत पर बेचना पड़ा। वहीं कुछ किसानों ने समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग भी रखी है।
कुल मिलाकर, सरकारी खरीद शुरू होने से किसानों को राहत मिली है और समय पर भुगतान की व्यवस्था से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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