सुनील कुमार गुप्ता
कांके । बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार को झारखंड राज्य में सरसों अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय तिलहन सम्मेलन-2026 के दौरान स्वर्ण पदक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
देशभर में सोसायटी फॉर रेपसीड-मस्टर्ड रिसर्च, भारतीय सरसों एवं रेपसीड अनुसंधान संस्थान, भरतपुर (राजस्थान) द्वारा रेपसीड-सरसों अनुसंधान एवं विकास के विभिन्न पहलुओं पर वैज्ञानिकों के उत्कृष्ट योगदान के लिए स्थापित 5 स्वर्ण पदकों में से एक स्वर्ण पदक डॉ. अरुण को मिला। इस सम्मेलन में देशभर से 350 वैज्ञानिकों ने भाग लिया। उनके द्वारा विकसित उन्नत किस्म ‘बिरसा भाभा मस्टर्ड-1’ झारखंड में अत्यंत लोकप्रिय है और व्यापक क्षेत्र में इसकी खेती की जा रही है। यह किस्म बड़े दानों वाली है तथा इसमें 40 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है। इसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई के सहयोग से विकसित किया गया है। यह 112–120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और इसकी औसत उत्पादन क्षमता 14.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
यह पुरस्कार 8 फरवरी, 2026 को आईएआरआई, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर पादप किस्म एवं किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा पूर्व महानिदेशक, आईसीएआर, नई दिल्ली डॉ. त्रिलोचन महापात्र और रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद कुमार भी उपस्थित थे।
बीएयू के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे, निदेशक (अनुसंधान) डॉ. पी.के. सिंह तथा आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग की अध्यक्ष डॉ. मणिगोपा चक्रवर्ती ने डॉ. अरुण को इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

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